मिथिला पंचांग के अनुसार विवाह के मुहूर्त 2026 में – Vivah Muharat In 2026
नमस्कार दोस्तों आज के पोस्ट मे आप देखेंगे की मिथिला पंचांग के अनुसार विवाह के मुहूर्त 2026 में कब है । मिथिला पंचांग को मैथिली पंचांग या मैथिली पत्रा भी कहा जाता है । इस पंचांग का उपयोग मिथिलांचल के क्षेत्र मे अत्यधिक किया जाता है यह एकदम सटीक और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित पंचांग है ।

विवाह सिर्फ दो लोगों के बीच ही नहीं बल्कि एक सामाजिक और धार्मिक रूप से दो लोगों का एक पवित्र मिलन है, जिसे आम बोलचाल में शादी कहा जाता है। यह परिवार और समाज के निर्माण की सबसे छोटी और महत्वपूर्ण इकाई की एक शुरुवात होती है ।
इसिलए इसको एक शुभ महूर्त मे करना बहुत ही आवश्यक है और इसी शुभ महूर्त के लिए अलग अलग पंचांग होते है लेकिन आज हम मिथिला पंचांग के अनुसार साल 2026 के सारे महीने की जानकारी देने वाले है ।
मिथिला पंचांग के अनुसार 2026 के सारे महीनो के शुभ तिथि
इस पोस्ट मे मिथिला पंचांग के अनुसार 2026 के सारे महीनो के शुभ तिथि लिखा हुआ मिलेगा जिस से आपको याद रखने मे कोई परेशानी नहीं होगा।
मिथिला पंचांग अनुसार विवाह के शुभ दिन (2026)
फरवरी 2026
फरवरी माह में विवाह के लिए कुल 9 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं:
5 फरवरी (गुरुवार),
6 फरवरी (शुक्रवार),
8 फरवरी (रविवार),
15 फरवरी (रविवार),
19 फरवरी (गुरुवार),
20 फरवरी (शुक्रवार),
22 फरवरी (रविवार),
25 फरवरी (बुधवार) और
26 फरवरी (गुरुवार)।
मार्च 2026
मार्च में विवाह के 4 शुभ दिन हैं:
4 मार्च (बुधवार),
9 मार्च (सोमवार),
11 मार्च (बुधवार) और
13 मार्च (शुक्रवार)।
अप्रैल 2026
अप्रैल माह में शादी-विवाह के लिए 4 शुभ तिथियां हैं:
17 अप्रैल (शुक्रवार),
20 अप्रैल (सोमवार),
26 अप्रैल (रविवार) और
30 अप्रैल (गुरुवार)।
मई 2026
मई के महीने में कुल 5 शुभ लग्न पड़ रहे हैं:
1 मई (शुक्रवार),
6 मई (बुधवार),
8 मई (शुक्रवार),
10 मई (रविवार) और
13 मई (बुधवार)।
जून 2026
जून में विवाह के 6 शुभ दिन उपलब्ध हैं:
19 जून (शुक्रवार),
24 जून (बुधवार),
25 जून (गुरुवार),
26 जून (शुक्रवार),
28 जून (रविवार) और
29 जून (सोमवार)।
जुलाई 2026
जुलाई माह में कुल 6 शुभ मुहूर्त हैं:
1 जुलाई (बुधवार),
2 जुलाई (गुरुवार),
3 जुलाई (शुक्रवार),
6 जुलाई (सोमवार),
9 जुलाई (गुरुवार) और
12 जुलाई (रविवार)।
विवाह के शुभ दिन नवंबर 2026
चातुर्मास समाप्ति के बाद नवंबर में विवाह के 4 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं:
22 नवंबर (रविवार),
25 नवंबर (बुधवार),
26 नवंबर (गुरुवार) और
30 नवंबर (सोमवार)।
विवाह के शुभ दिन दिसंबर 2026
साल के अंतिम महीने दिसंबर में कुल 6 शुभ लग्न हैं:
4 दिसंबर (शुक्रवार),
6 दिसंबर (रविवार),
9 दिसंबर (बुधवार),
10 दिसंबर (गुरुवार),
11 दिसंबर (शुक्रवार) और
14 दिसंबर (सोमवार)।
मिथिला पंचांग के अनुसार विवाह के मुहूर्त 2027
जनवरी 2027 जनवरी माह में विवाह के लिए कुल 5 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं
18 जनवरी (सोमवार),
24 जनवरी (रविवार),
28 जनवरी (गुरुवार),
29 जनवरी (शुक्रवार) और
31 जनवरी (रविवार)।
फरवरी 2027 फरवरी के महीने में कुल 9 शुभ लग्न पड़ रहे हैं
07 फरवरी (रविवार),
10 फरवरी (बुधवार),
11 फरवरी (गुरुवार),
15 फरवरी (सोमवार),
21 फरवरी (रविवार),
22 फरवरी (सोमवार),
24 फरवरी (बुधवार),
25 फरवरी (गुरुवार) और
28 फरवरी (रविवार)।
मिथिला पंचांग के अनुसार विवाह के मुहूर्त मार्च 2027
01 मार्च (सोमवार),
03 मार्च (बुधवार),
04 मार्च (गुरुवार),
10 मार्च (बुधवार) और
11 मार्च (गुरुवार)।
अप्रैल 2027 अप्रैल में विवाह के लिए कुल 6 शुभ मुहूर्त हैं
10 अप्रैल (शनिवार),
21 अप्रैल (बुधवार),
23 अप्रैल (शुक्रवार),
25 अप्रैल (रविवार),
28 अप्रैल (बुधवार) और
29 अप्रैल (गुरुवार)।
मई 2027 मई माह में सबसे अधिक 14 शुभ लग्न उपलब्ध हैं
02 मई (रविवार),
03 मई (सोमवार),
07 मई (शुक्रवार),
09 मई (रविवार),
13 मई (गुरुवार),
17 मई (सोमवार),
20 मई (गुरुवार),
21 मई (शुक्रवार),
23 मई (रविवार),
24 मई (सोमवार),
26 मई (बुधवार),
27 मई (गुरुवार),
30 मई (रविवार) और
31 मई (सोमवार)।
जून 2027 जून के महीने में विवाह के कुल 9 शुभ दिन हैं
02 जून (बुधवार),
04 जून (शुक्रवार),
09 जून (बुधवार),
10 जून (गुरुवार),
13 जून (रविवार),
14 जून (सोमवार),
18 जून (शुक्रवार),
23 जून (बुधवार) और
24 जून (गुरुवार)।
जुलाई 2027 चातुर्मास शुरू होने से पहले जुलाई में 5 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं
01 जुलाई (गुरुवार),
02 जुलाई (शुक्रवार),
07 जुलाई (बुधवार),
08 जुलाई (गुरुवार) और
09 जुलाई (शुक्रवार)।
महत्वपूर्ण सूचना: मिथिला पंचांग के उपलब्ध संस्करण में वर्ष 2027 के विवाह मुहूर्त की जानकारी फिलहाल जुलाई 2027 तक ही उपलब्ध है। इसलिए इस पेज पर जुलाई 2027 तक के विवाह मुहूर्त शामिल किए गए हैं। शेष महीनों की जानकारी उपलब्ध होने पर इस पेज को अपडेट किया जाएगा।
मिथिला मे विवाह के साथ साथ दुरागमन का भी प्रचलन है । विदाई को ही दुरागमन भी कहते है, लेकिन इसमे थोड़ा सा अंतर होता है विदाई मे अगले दिन ही दुल्हन ससुराल चली जाती है। और दुरागमन मे कम से कम शादी के चतुर्थी या फिर एक साल , 3 साल और पाँच साल बाद ही दुल्हन अपने ससुराल जाती है ।
यदि आप पंचांग, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त और मिथिला से जुड़ी धार्मिक जानकारी नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी समय-समय पर प्रकाशित होने वाले लेख भी अवश्य देखें। इस जानकारी को अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें।
मिथिला विवाह में शुभ मुहूर्त कैसे चुना जाता है?
शुभ मुहूर्त पंचांग, तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति देखकर तय किया जाता है। और इसी के लिए मिथिला पंचाग का उपयोग किया जाता है |
मिथिला विवाह में पान का क्या महत्व है?
मिथिला मे पान को शुभ माना जाता है, इसलिए इसका उपयोग विवाह के बहुत सारे रस्मों में किया जाता है। पान के अलावा मखान और माछ को भी शुभ माना जाता है ।
मिथिला पंचांग से विवाह मुहूर्त कैसे निकाला जाता है?
पचांग में शुभ तिथि, नक्षत्र, योग, करण और लग्न देखकर विवाह का मुहूर्त निकाला जाता है।
विवाह के लिए सबसे शुभ नक्षत्र कौन से माने जाते हैं?
रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा और रेवती जैसे नक्षत्र विवाह के लिए शुभ माने जाते हैं।
क्या विवाह मुहूर्त सभी लोगों के लिए एक जैसा होता है?
नहीं, कई बार वर और कन्या की जन्म कुंडली के अनुसार अलग मुहूर्त भी निकाला जाता है।







2 Comments