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मिथिला पंचांग के अनुसार 2026 में भदवा कब है – Bhadwa Kab hai 2026 me

मैथिली पंचांग के अनुसार हर एक माह मे 5 दिन ऐसे होते है, जिसे भदवा – Bhadwa या पंचक कहा जाता है। भदवा का ही अन्य नाम पंचक है , पंचक आमतौर पर इसलिए बोला जाता है क्योंकी ये पाँच दिन का होता है। भदवा के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस कार्यकाल में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले एक बार जरूर विचार करना चाहिए क्योंकी इसका परिणाम अशुभ हो सकता है।

भदवा

मिथिला पंचांग के अनुसार साल 2026 में पड़ने वाला भदवा और पंचक

जनवरी 2026

साल का पहला पंचक 20 जनवरी (मंगलवार) को दोपहर 1:26 बजे से शुरू होगा और 25 जनवरी (रविवार) को दोपहर 12:01 बजे समाप्त होगा।

फरवरी 2026

फरवरी माह में पंचक का आरंभ 16 फरवरी (सोमवार) को रात 8:52 बजे होगा, जो 21 फरवरी (शनिवार) को रात 07:58 बजे तक रहेगा।

मार्च 2026

मार्च में पंचक 15 मार्च (रविवार) को देर रात (रात्रि शेष) 04:24 बजे शुरू होकर 20 मार्च (शुक्रवार) को रात 03:57 बजे समाप्त होगा।

अप्रैल 2026

अप्रैल का पंचक 12 अप्रैल (रविवार) को दिन के 11:53 बजे से प्रारंभ होगा और 17 अप्रैल (शुक्रवार) को दोपहर 12:00 बजे पूरा होगा।

मई 2026

मई माह में पंचक 09 मई (शनिवार) को रात 07:32 बजे लगेगा और 14 मई (गुरुवार) को रात 08:02 बजे समाप्त होगा।

जून 2026

जून में पंचक की शुरुआत 05 जून (शुक्रवार) को रात 03:08 बजे से होगी, जो 10 जून (बुधवार) को रात्रि शेष 04:10 बजे खत्म होगा।

जुलाई 2026

जुलाई का पहला पंचक 03 जुलाई (शुक्रवार) को सुबह 10:41 बजे शुरू होकर 09 जुलाई (बुधवार) को दोपहर 12:13 बजे समाप्त होगा।

जुलाई – अगस्त 2026

जुलाई का दूसरा पंचक 30 जुलाई (गुरुवार) को शाम 06:08 बजे से प्रारंभ होगा और 04 अगस्त (मंगलवार) को रात 08:13 बजे तक रहेगा।

अगस्त – सितंबर 2026

अगस्त माह का पंचक 27 अगस्त (गुरुवार) को दोपहर 01:33 बजे शुरू होकर 01 सितंबर (मंगलवार) को रात 03:23 बजे समाप्त होगा।

सितंबर 2026 में भदवा

सितंबर में पंचक 23 सितंबर (बुधवार) को सुबह 08:58 बजे से शुरू होगा और 28 सितंबर (सोमवार) को दोपहर 12:10 बजे समाप्त होगा।

अक्टूबर 2026 में भदवा

अक्टूबर माह का पंचक 20 अक्टूबर (मंगलवार) को दोपहर 03:31 बजे लगेगा, जो 25 अक्टूबर (रविवार) को रात 08:04 बजे तक चलेगा।

नवंबर 2026 में भदवा

नवंबर में पंचक का आरंभ 16 नवंबर (सोमवार) को रात 11:29 बजे होगा और इसकी समाप्ति 21 नवंबर (शनिवार) को रात 03:55 बजे होगी।

दिसंबर 2026 में भदवा

साल का अंतिम पंचक 13 दिसंबर (रविवार) को शाम 05:40 बजे से शुरू होकर 29 दिसंबर (मंगलवार) को सुबह 11:38 बजे समाप्त होगा।

भदवा – Bhadwa के दौरान भूल कर भी ना करें ये काम 

  1. शास्त्रों के अनुसार भदवा के इन पाँच दिनों के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए :
  2. भदवा के दौरान दक्षिण दिशा मे यात्रा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसे यम का दिशा भी कहते है।
  3. इस दौरान लकड़ी से बनी कोई नई वस्तु नहीं खरीदना चाहिए। 
  4. भदवा के दौरान छत की ढ़लाई नहीं करवाना चाहिए, इस से घर मे लड़ाई झगड़ा का खतरा बना रहता है। 
  5. सोना-चांदी और महंगी वस्तुएं इत्यादि भदवा के दौरान नहीं खरीदना चाहिए। 
  6. भदवा में विवाह, उपनयन, मुंडन, गृहप्रवेश, भूमिपूजन, नामकरण , और कोई नया व्यापार नहीं करना चाहिए।

भदवा – Bhadwa में कोन-सा उपाय करें

  1. इस दौरान गरीबों एवं जरूरतमंद लोगों का सहायता करना चाहिए ।
  2. दवाई , कंबल, और भोजन इत्यादि का दान करने से लाभ मिलेगा। 
  3. गायों, कुत्तों और अन्य भूखे जीवों को खाना खिलाना चाहिए। 

यदि आप पंचांग, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त और मिथिला से जुड़ी धार्मिक जानकारी नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी समय-समय पर प्रकाशित होने वाले लेख भी अवश्य देखें। इस जानकारी को अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें। और अपनी राय और जो भी सुझाव हो कमेन्ट मे अवश्य बताए ।

हिंदू कैलेंडर में भादवा क्या है?

भादवा हर महीने मे 5 दिन का एक ऐसा समय होता है जिसमे कोई शुभ कार्य की शुरुवात करना अच्छा नहीं माना जाता है |

भादवा में क्या नहीं करना चाहिए ?

भदवा में विवाह, उपनयन, मुंडन, गृहप्रवेश, भूमिपूजन, नामकरण , दक्षिण दिशा की यात्रा करना, चारपाई या पलंग बनवाना, घर की छत डलवाना और कोई नया व्यापार नहीं करना चाहिए।

भदवा में कोन-सा उपाय करना चाहिए ?

गायों, कुत्तों और अन्य भूखे जीवों को खाना खिलाना चाहिए। और दवाई , कंबल, और भोजन इत्यादि का दान करने से लाभ मिलेगा।

भदवा/पंचक कब शुरू होता है?

भदवा/पंचक जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से आगे बढ़कर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है तब इस ये शुरू होता है और अगले 5 दिनों तक ये रहता है , वैसे तो ये हर महीने मे एक बार पड़ता है लेकिन मलमास या अधिक मास के कारण ये किसी किसी महीने मे 2 बार भी पड़ जाता है।

पंचक कितने प्रकार के होते हैं?

वार के आधार पर पंचक को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे रोग पंचक-रविवार से शुरू होने पर, राज पंचक- सोमवार से शुरू होने पर, अग्नि पंचक – मंगलवार से शुरू होने पर, मृत्यु पंचक- शुक्रवार से शुरू होने पर और चोर पंचक- शनिवार से शुरू होने पर ।

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