मिथिला पंचांग के अनुसार उपनयन(जनेऊ) के मुहूर्त 2026-2027 में
आपको मिथिला पंचांग के अनुसार उपनयन/जनेऊ के मुहूर्त 2026 – 2027 में कब है, इस पोस्ट मे आप इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते है। मैथिली पञ्चाङ्ग का उपयोग मिथिलांचल के क्षेत्र मे अत्यधिक किया जाता है यह एक वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित और सटीक पंचांग है। मिथिला पंचांग का अन्य नाम मैथिली पंचांग/मैथिली पत्रा भी है।
हिन्दू धर्म के 16 निर्धारित संस्कारों मे से एक है उपनयन/जनेऊ संस्कार। सनातन धर्म मे उलेखित 10वां संस्कार जनेऊ होता है।

उपनयन संस्कार का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
अगर आप उपनयन करने का प्लान कर रहे हैं, तो यह समझना होगा की इसमे कई प्रकार की रसमे होती है। हर रस्म का अपना एक अलग महत्व है।चलिए इसे आसानी से समझते हैं:
पहला : मातृका पूजन और नंदीमुख
मिथिला मे कोई भी शुभ काम बिना बड़ों के आशीर्वाद के शुरू नहीं होता। इसमें सबसे पहले कुलदेवी और पितरों (पूर्वजों) की पूजा की जाती है। उनसे प्रार्थना की जाती है कि पूरा कार्यक्रम निर्विघ्न रूप से पूरा हो।
दूसरा : मंडप छादन (मड़वा)
यह घर के आँगन में बांस और खरही से बना एक पवित्र मड़वा ( झोंपरी जैसे ) होता है। सारी पूजा इसी मंडप के नीचे होती है।
तीसरा : मुंडन और स्नान
बच्चे के बाल काटे जाते हैं। यह पुराने विचारों को छोड़ने का प्रतीक है। इसके बाद बच्चे को हल्दी का उबटन लगाकर तालाब/पोखर के जल से स्नान कराया जाता है।
चौथा : जनेऊ धारण
पुजारी मंत्रोच्चार करते हैं और बच्चे को यज्ञोपवीत ( जनेऊ ) पहनाया जाता है। यह धागा बाएं कंधे से शुरू होकर दाईं कमर तक जाता है।
पांचवां : ब्रह्मोपदेश
पिता या जो भी बच्चे के गुरु होते है वो बच्चे को पीले कपड़े के नीचे छिपाकर उसके कान में ‘गायत्री मंत्र’ देते हैं। इसे ही ब्रह्मोपदेश कहते हैं।
छठा : भिक्षाटन
जनेऊ पहनने के बाद बच्चा एक ब्रह्मचारी का रूप लेता है। वह अपनी माँ, चाची, बुआ और अन्य रिश्तेदारों से शिक्षा के लिए ‘भिक्षा’ मांगता है।
मिथिला पंचांग अनुसार उपनयन मुहूर्त 2026
जनवरी 2026 साल की शुरुआत में जनवरी माह में उपनयन/जनेऊ संस्कार के लिए 1 शुभ दिन उपलब्ध है
29 जनवरी (गुरुवार)।
फरवरी 2026 फरवरी के महीने में उपनयन संस्कार के लिए कुल 3 शुभ मुहूर्त हैं
22 फरवरी (रविवार),
26 फरवरी (गुरुवार) और
27 फरवरी (शुक्रवार)।
मार्च 2026 मार्च माह में जनेऊ संस्कार के लिए 2 शुभ तिथियां उपलब्ध हैं
27 मार्च (शुक्रवार) और
29 मार्च (रविवार)।
अप्रैल 2026 अप्रैल के महीने में कुल 2 शुभ दिन पड़ रहे हैं
21 अप्रैल (मंगलवार) और
27 अप्रैल (सोमवार)।
जून 2026 जून माह में उपनयन संस्कार के लिए सबसे अधिक 4 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं
17 जून (बुधवार),
19 जून (शुक्रवार),
24 जून (बुधवार) और
25 जून (गुरुवार)।
मिथिला पंचांग अनुसार उपनयन मुहूर्त 2027
फरवरी 2027 फरवरी माह में उपनयन के लिए कुल 4 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं
9 फरवरी (मंगलवार),
11 फरवरी (गुरुवार),
16 फरवरी (मंगलवार) और
17 फरवरी (बुधवार)।
मार्च 2027 मार्च के महीने में जनेऊ संस्कार के लिए 2 शुभ तिथियां हैं
17 मार्च (बुधवार) और
18 मार्च (गुरुवार)।
अप्रैल 2027 अप्रैल माह में उपनयन संस्कार का 1 शुभ मुहूर्त उपलब्ध है
11 अप्रैल (रविवार)।
मई 2027 मई के महीने में उपनयन के लिए 1 शुभ दिन पड़ रहा है
10 मई (सोमवार)।
जून 2027 जून माह में कुल 4 शुभ मुहूर्त हैं
7 जून (सोमवार),
9 जून (बुधवार),
13 जून (रविवार) और
14 जून (सोमवार)।
जुलाई 2027 चातुर्मास शुरू होने से पूर्व जुलाई में उपनयन संस्कार के लिए 2 शुभ तिथियां उपलब्ध हैं
6 जुलाई (मंगलवार) और
8 जुलाई (गुरुवार)।
मिथिला पंचांग के उपलब्ध संस्करण में वर्ष 2027 के उपनयनमुहूर्त की जानकारी फिलहाल जुलाई 2027 तक ही उपलब्ध है। इसलिए इस पेज पर जुलाई 2027 तक के उपनयन मुहूर्त शामिल किए गए हैं। शेष महीनों की जानकारी उपलब्ध होने पर इस पेज को अपडेट किया जाएगा।
मिथिला में उपनयन
जब हम उपनयन की बात करते हैं, तो मिथिलांचल का जिक्र आना लाजमी है। मिथिला में यह संस्कार किसी शादी के फंगक्शन से कम नहीं होता!
क्या-क्या खास होता है?
- मंगलगीत: हफ्तों पहले से ‘उपनयन के गीत’ घर की महिलाएं गाना शुरू कर देती हैं।
- मड़वा की सजावट: आँगन में बांस का एक विशाल मड़वा बनता है।
- खान-पान: बिना दही-चूड़ा, तिलकोर के तरुआ, और तरह-तरह की मिठाइयों के तो कोई भी उत्सव मिथिला कअ अधूरा रहता है।
- हंसी-मजाक: भीख लेते समय बुआ और दीदी के साथ होने वाला मजाक पूरे माहौल मे हंसी मे बदल देती है।
उपनयन संस्कार गायत्री मंत्र से शुरू करना होता है और गायत्री मंत्र मे तीन चरण होते है जो इस प्रकार है :
- पहला चरण : ‘तत्सवितुर्वरेण्यं’
- दूसरा चरण : ‘भर्गोदेवस्य धीमहि’
- तीसरा चरण: ‘धियो यो न: प्रचोदयात्’
उपनयन अथवा जनेऊ का मंत्र:
यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुधग्रं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।
जनेऊ के बारे मे अन्य रोचक जानकारी
- बहुत से लोग को पता नहीं होता है की उपनयन का अन्य नाम जनेऊ एवं यज्ञोपवीत संस्कार भी है, इसलिए वो असमंजस की स्थिति मे रहते है ।
- जनेऊ 3 जीवा से मिल कर बना होता है और एक जीवा मे 3 तार (धागा) होते है इस तरह तारों की कुल संख्या 9 होती है।
- जनेऊ मे 5 गाँठे (बंधन) होती है जो ब्रह्मा, मोक्ष, धर्म, काम, तथा अर्थ को दर्शाता है।
- जनेऊ की लंबाई 96 अंगुल की होनी चाहिए क्युकी यह 64 कला और 32 विद्या को सीखने के लिए प्रेरित करता है।
यदि आप पंचांग, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त और मिथिला से जुड़ी धार्मिक जानकारी नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी समय-समय पर प्रकाशित होने वाले लेख भी अवश्य देखें। इस जानकारी को अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें।
जनेऊ का क्या नियम है?
जनेऊ को मल-मूत्र त्याग करने से पहले दायाँ कान पर लपेट लेना चाहिए और हाथ और पाँव धोने के बाद ही कान के उपर से निकालना चाहिए। इससे जनेऊ पवित्र बना रहता है।
जनेऊ किस दिन धारण करना चाहिए?
हिन्दू धर्म के शस्त्रों के अनुसार सावन के पूर्णिमा या रक्षा बंधन से पहले नया जनेऊ धारण करना चाहिए। क्यूंकी जनेऊ धारण के लिए ये दिन बहुत ही शुभ माना गया है।
जनेऊ शुद्ध करने का मंत्र?
जनेऊ अपवित्र हो जाने पर ये मंत्र “ एतावद्दिन पर्यन्तं ब्रह्म त्वं धारितं मया. जीर्णत्वात्वत्परित्यागो गच्छ सूत्र यथा सुखम्” के पढने के बाद दूसरा जनेऊ धारण कर लेना चाहिए।
उपनयन के लिए सही उम्र क्या है?
शास्त्रों के अनुसार, ब्राह्मणों के लिए 8 वर्ष, क्षत्रियों के लिए 11 वर्ष और वैश्यों के लिए 12 वर्ष शुभ मानी गई है। लेकिन आज के समय में लोग अपनी सुविधा के अनुसार आमतौर पर 8 से 15 साल के बीच इसे करते हैं।
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