झिझिया नृत्य क्या है और क्यों किया जाता है? Jhijhiya Dance of Mithila

झिझिया नृत्य नवरात्र/दुर्गा पूजा के दौरान गांवों और पूजा पंडालों में कुंवारी कन्याएं और महिलाएं इस लोकनृत्य को करती हैं । यह मुख्य रूप से बिहार और नेपाल के मिथिला क्षेत्र में किया जाता है । यह शहर के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बहुत लोकप्रिय है।

झिझिया नृत्य क्या है?

यूं तो झिझिया एक डांस का फॉर्म है लेकिन डांस के अलावा यह आस्था, साधना और सुरक्षा-चक्र का एक जीवित संस्कृति है। बिहार के मिथिलांचल -जैसे मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी और नेपाल के तराई इलाकों में यह नृत्य बेहद लोकप्रिय है।

झिझिया नृत्य

झिझिया नृत्य को केवल महिलाएं और कुंवारी कन्याएं ही प्रस्तुत करती हैं। यह नृत्य भक्ति और जादू-टोने के प्रतिरोध का एक सामूहिक प्रदर्शन है।

झिझिया का मुख्य रूप से हिन्दी महीने के आश्विन में शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में आयोजन किया जाता हैं । जैसे गुजरात में नवरात्रि के समय ‘गर्बा’ या ‘डांडिया’ का आयोजन होता है , ठीक उसी तरह मिथिला के हर गांव में रात के समय झिझिया की गूंज सुनाई देती है।

झिझिया नृत्य की उत्पत्ति कैसे हुई

राजा विजय सिंह की पौराणिक कथा

माना जाता है की बहुत पहले की समय में, एक राजा थे विजय सिंह। उनके राज्य में उनकी प्रजा बहुत सुखी थी, लेकिन धीरे-धीरे राज्य में एक के बाद एक मुसीबत सब आने लगी। गांवों में अजीब-अजीब घटनाएँ होने लगीं। बच्चे बीमार पड़ जाते, फसलें सूख जातीं और रात के समय लोगों को डरावनी आवाज़ें सुनाई देतीं। इस से लोग काफी डर गए।

धीरे-धीरे यह बात फैलने लागि कि यह सब डायनों का किया धरा है। राजा विजय सिंह इस सब बातों को लेकर बहुत चिंतित हो गए। उन्होंने कई पंडितों और तांत्रिकों से सलाह माँगी, लेकिन कोई भी उन्हें इस बुरी शक्ति से बचाने में कामयाब नहीं हो पाया।

तब राजा विजय सिंह की पत्नी, जो बहुत समझदार और विवेकशील थीं, उन्होंने एक रास्ता सुझाया। उन्होंने कहा कि अगर हम माँ दुर्गा की सच्ची भक्ति करें और एक खास तरह का अनुष्ठान करें, तो इन सब से छुटकारा मिल सकता है। फिर उन्होंने गाँव की सभी महिलाओं और कुंवारी कन्याएं को एक साथ आने के लिए बोल । फिर सबने एक साथ मिलकर माँ दुर्गा की पूजा की और उनसे रक्षा करने के लिए प्राथना करने लगीं। इस अनुष्ठान के जरिए तांत्रिक और डायनों तंत्रों को निष्फल कर दिया गया था।

फिर उन्होंने मिलकर एक नई परंपरा शुरू की जिसे बाद में ‘झिझिया’ नाम मिला। इस महिलाएँ पूरे विधि-विधान से हर साल नवरात्रि मे करने लगे ,तब से लेकर आजतक या परंपरा चलता आ रहा है ।

झिझिया नृत्य की विधि

झिझिया नृत्य के लिए महिलाएं सिर पर एक घड़े को रखते है जिसमे सैकड़ों छोटे-छोटे छेद होते हैं और उस घड़े अंदर एक दीपक जल रहा होता है। फिर बिना हाथ लगाए, केवल सिर पर उस घड़े को संतुलन करके घंटों नृत्य करना किसी साधना से कम नहीं होता है।

झिझिया नृत्य को लोकगीत के साथ किया जाता है , लोकगीत ज्यादातर मैथिली भाषा की होती हैं । इसमे से कुछ प्रमुख लोकगीत ये है –

  • तोहरे भरोसे ब्रहम बाबा झिझिया बनइलिअइ हो. ब्रहम बाबा झिझरी पर होईअऊ न असवार…
  • चल चल गे डयनियाँ ब्रहम तर, तोरा बेटा के खयबऊ ब्रहम तर..
  • देवी मोरे अयलिन निहुरि पईयाँ लागू. की देखे अयलिन मैया की देख मुसकईलिन..

झिझिया नृत्य की वेशभूषा

इस नृत्य में महिलाएं मिथिला की पारंपरिक साड़ियां -जैसे लाल, पीली या नारंगी साड़ी पहनती हैं। हाथों में चूड़ियां, माथे पर सिंदूर या बिंदी और पैरों में आलता लगा कर सजाया जाता है। इसके बाद एक समूह होता है लड़कियों का जो इस नृत्य को करते है ।

झिझिया नृत्य केवल एक नाच-गाना नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों, हमारी मिट्टी की महक और हमारी माताओं-बहनों की उस सामूहिक ताकत का प्रतीक है जो अपनी निष्ठा और भक्ति से हर आपदा को टालने का दम रखती हैं। यह नृत्य हमें सिखाता है कि कला कैसे सुरक्षा का कवच बन सकती है, और कैसे आस्था अंधेरे में भी रोशनी का दीया जला सकती है।

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झिझिया कहाँ का लोक नृत्य है?

झिझिया नृत्य मुख्य रूप से भारत के बिहार राज्य के मिथिलांचल क्षेत्र जैसे मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी और नेपाल के तराई वाले मैथिली भाषी इलाकों का एक प्रसिद्ध लोकनृत्य है।

झिझिया के घड़े में ढेर सारे छेद क्यों किए जाते हैं?

मान्यता के अनुसार, घड़े में सैकड़ों छेद इसलिए किए जाते हैं ताकि बुरी नजर रखने वाली डायनें या तांत्रिक उन छेदों को गिनने में उलझ जाएं। ऐसा माना जाता है कि घड़े के घूमते समय छेदों को गिनना असंभव होता है, जिससे टोने-टोटके का असर खत्म हो जाता है।

क्या झिझिया नृत्य में केवल महिलाएं ही भाग ले सकती हैं?

झिझिया पूरी तरह से महिलाओं और कुंवारी कन्याएं द्वारा किया जाने वाला नृत्य है। पुरुषों की भूमिका इसमें केवल ढोलक या मंजीरा बजाने वाले संगीताकार के रूप में हो सकती है।

झिझिया नृत्य का इतिहास क्या है?

झिझिया नृत्य की उत्पत्ति राजा विजय सिंह की पौराणिक कथा के से जुड़ी हुई है कथा के अनुसार उनके राज्यों मे बहुत सारी मुसीबत आने लगा था, तब उनकी पत्नी ने इस परंपरा को स्टार्ट किया था ।

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