वन देवी मंदिर बिहटा: इतिहास, कहानी और कैसे पहुंचें
मां वन देवी मंदिर बिहटा — संक्षिप्त जानकारी
मां वन देवी मंदिर बिहटा
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| 📍 स्थान | बिहटा, पटना, बिहार |
| 🙏 देवी | मां वन देवी |
| 🔱 पूजा स्वरूप | पिंड स्वरूप |
| 🚉 निकटतम रेलवे स्टेशन | बिहटा |
| 📏 पटना से दूरी | लगभग 30–35 किमी |
| 🌺 प्रमुख पर्व | नवरात्रि |
| 📅 अधिक श्रद्धालु | रविवार और मंगलवार |

वन देवी मंदिर राजधानी पटना से करीब 35 किमी और बिहटा रेलवे स्टेशन से 5 किमी की दूरी पर स्थित है । यह मंदिर अमहरा, राघोपुर और कंचनपुर गांव की त्रिकोणीय सीमा पर स्थित है।
वन देवी मंदिर का इतिहास
मां वन देवी मंदिर के संबंध में अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं। कई स्थानीय और मीडिया रिपोर्ट इसे लगभग 350 से 400 वर्ष पुराना बताते हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट इसे 16वीं सदी से जोड़ कर बताते हैं।
मंदिर के इतिहास से जुड़ी सबसे प्रचलित मान्यता मां विंध्यवासिनी और उनके भक्त विद्यानंद मिश्र से संबंधित है। कहा जाता है कि उस समय इस क्षेत्र में काफी घना जंगल था जहां देवी के पिंड की स्थापना की गई। जंगल के बीच स्थापित होने के कारण देवी को वन देवी के नाम से लोग जानने लगे। कई जगह इस स्थान को कनखा माई के नाम से भी जाने जाने का उल्लेख मिलता है।
मां वन देवी मंदिर की स्थापना की कहानी
मान्यतों के अनुसार विद्यानंद मिश्र मां विंध्यवासिनी के परम भक्त थे और वे नियमित रूप से विंध्याचल जाकर देवी की पूजा किया करते थे। कहा जाता है की उम्र बढ़ने के साथ जब उनके लिए इतनी दूर यात्रा करना कठिन हो गया, तब एक रात मां विंध्यवासिनी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिया।
सपने मे देवी मां विंध्यवासिनी ने उन्हें अपने पिंड का एक अंश लेकर अपने क्षेत्र में स्थापित करने का सपना दिया। इसके बाद विद्यानंद मिश्र विंध्याचल से पिंड का एक अंश लेकर बिहटा क्षेत्र के उस वन क्षेत्र में स्थापना करके पूजा प्रारंभ किए। माना जाता है की उस समय यह स्थान जंगल से घिरा हुआ था, इसलिए देवी को वन देवी के नाम से भी जाना जाने लगा।
वन देवी मंदिर से जुड़े रहस्य
मान्यताओ के अनुसार सूर्यास्त के बाद मंदिर के कपाट बंद होने के बाद यहां कोई नहीं रुकता। यहां तक कि मंदिर के पुजारी भी शाम के बाद अपने घर चले जाते हैं, क्योंकि रात के समय मां स्वयं मंदिर परिसर में विचरण करती हैं।
मां वन देवी को लेकर स्थानीय भक्तों में मनोकामना पूर्ण होने पर कई श्रद्धालु अपनी इच्छा पूरी होने के बाद देवी को घंटा चढ़ाने की परंपरा का पालन करते हैं।
वन देवी मंदिर कैसे पहुंचे?
पटना से वन देवी मंदिर
पटना से मंदिर की दूरी लगभग 30–35 किलोमीटर बताई जाती है। सड़क मार्ग से बिहटा की ओर जाने के बाद अमहारा क्षेत्र से मंदिर की तरफ जाया जा सकता है।
ट्रेन से कैसे पहुंचे?
मंदिर के लिए नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन बिहटा रेलवे स्टेशन है जो मात्र मंदिर लगभग 5 किलोमीटर दूर है। वहां से स्थानीय वाहन या ऑटो आदि के माध्यम से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे?
पटना से बिहटा की ओर जाने वाले मार्ग से मंदिर क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है। अमहारा गांव की तरफ मंदिर जाने के लिए मुख्य प्रवेश मार्ग के द्वारा।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
वन देवी मंदिर कहां स्थित है?
मां वन देवी मंदिर बिहार के पटना जिले के बिहटा क्षेत्र में अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों की सीमा के आसपास स्थित है।
वन देवी मंदिर पटना से कितनी दूर है?
मंदिर पटना से लगभग 30–35 किलोमीटर दूर बताया जाता है।
वन देवी मंदिर किस देवी को समर्पित है?
यह मंदिर मां वन देवी को समर्पित है। स्थानीय मान्यता में उनका संबंध मां विंध्यवासिनी से जोड़ा जाता है।
क्या वन देवी मंदिर में देवी की मूर्ति है?
मंदिर की प्रमुख विशेषता यह है कि यहां देवी की पूजा पारंपरिक प्रतिमा के बजाय पिंड स्वरूप में किए जाने की मान्यता है।
वन देवी मंदिर कितना पुराना है?
विभिन्न रिपोर्टों में मंदिर को लगभग 350 से 400 वर्ष पुराना बताया गया है। हालांकि इसकी सटीक स्थापना तिथि का प्रमाणित ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।
वन देवी मंदिर की स्थापना किसने की थी?
स्थानीय मान्यता के अनुसार मां विंध्यवासिनी के भक्त विद्यानंद मिश्र ने यहां पिंड की स्थापना की थी।
मंदिर को वन देवी क्यों कहा जाता है?
लोकमान्यता के अनुसार जब यहां देवी की स्थापना हुई थी, तब यह क्षेत्र घने जंगल से घिरा हुआ था। इसी कारण देवी को वन देवी कहा जाने लगा।
क्या सूर्यास्त के बाद वन देवी मंदिर जाना मना है?
स्थानीय परंपरा में सूर्यास्त के बाद मंदिर में रुकने से बचने की मान्यता है। इससे जुड़ी एक लोककथा के अनुसार रात में देवी मंदिर परिसर में विचरण करती हैं।
वन देवी मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ कब होती है?
नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रविवार और मंगलवार को भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ होने की जानकारी मिलती है।
वन देवी मंदिर 2026 में अचानक चर्चा में क्यों आया?
2026 में मंदिर की चर्चा बढ़ने का एक कारण आगामी फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ है, जिसकी कहानी के लिए बिहार के वन देवी मंदिर और उससे जुड़ी लोककथाओं से प्रेरणा लिए जाने की जानकारी सामने आई है।



